Life Style

अपनी रीढ़ को बनाएं मजबूत

Life Style (giltv) रीढ़ या स्पाइन हमारे शरीर का आधार है और सही पास्चर (अवस्था या मुद्रा) में नहीं बैठने या सोने की वजह से पीठ दर्द, कमर दर्द और टांगों में कई प्रकार से दर्द होता है। यह दर्द बाद में रीढ़ से संबंधित किसी रोग में भी बदल जाता है। कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी का दर्द किसी प्रकार के रोग या रीढ़ की हड्डी से संबंधित विकार का संकेत भी दे सकता है।”
आज की जीवनशैली ही ऐसी हो गई है कि लोग घंटों कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल में लगे रहते हैं। इतने व्यस्त हैं कि ब्रेक तक लेने का समय नहीं और फिर गलत पोस्चर में बैठकर काम करते रहते हैं। गलत पास्चर में बैठने का सबसे ज्यादा बुरा असर रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। गलत पास्चर में कुर्सी पर बैठने, उठने या झुक कर गाड़ी चलाने के कारण पीठ में दर्द की समस्या हो जाती है। यह स्थिति रीढ़ की हड्डी को ज्यादा देर तक सीधा न रखने के कारण पैदा होती है। लंबे समय तक बैठे रहने से गर्दन और पीठ दोनों पर जोर पड़ता है और इससे इंटरवर्टिबरल डिस्क में सूजन का खतरा रहता है। बैक बोन या वर्टिबरल कॉलम एक के बाद एक हड्डियों और मुलायम संरचना (डिस्क) से बना होता है। इनमें सूजन आ जाती है तो स्पाइनल कॉर्ड बुरी तरह जख्मी हो जाता है और पीठ की हड्डी से जुड़ी कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। रीढ़ की हड्डी खोपड़ी से लेकर पेल्विस हिस्से तक चलती है। रीढ़ पूरे शरीर के वजन को संतुलित करके शरीर की संरचना को सपोर्ट देती है और इससे आप शरीर को हिला-डुला सकते हैं। रीढ़ की हड्डी को नुकसान होने से चलने, झुकने और घूमने में परेशानी हो सकती है।

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